सपना
एक दिन सपने में, मुझे मिला एक थैला।
थैला था तो सुन्दर, पर थोड़ा था मैला।
मैं ने धीरे से उसे खोला तो उसमे से निकला।
तारों की एक माला।
एक प्यारा चंदा, चाँदनी रातों वाला।
एक सूरज जो देता उजाला।
ये सारे बाहर निकले, मैं चली उनके पीछे।
वो भागे, मैं भागी, पीछे-पीछे।
फिर भी न मिले वो,
क्योंकि तब तक हो गया था सवेरा।
थैला था तो सुन्दर, पर थोड़ा था मैला।
मैं ने धीरे से उसे खोला तो उसमे से निकला।
तारों की एक माला।
एक प्यारा चंदा, चाँदनी रातों वाला।
एक सूरज जो देता उजाला।
ये सारे बाहर निकले, मैं चली उनके पीछे।
वो भागे, मैं भागी, पीछे-पीछे।
फिर भी न मिले वो,
क्योंकि तब तक हो गया था सवेरा।
Loved it, nice one :)
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