Wednesday, November 26, 2014

Sharabi..

शराबी

बेखबर हूँ मैं, मेरे कदम खुदबखुद बढ़ रहे हैं मैखाने की ओर। 
मैं जानता हूँ.. मैं जा रहा हूँ, ज़िन्दगी के उजाले से अँधेरी तैखाने की ओर। 

कभी मैं भी हुआ करता था, खुशहाल और आबाद।
इस ज़हर ने बना दिया मुझे कँगहाल और बर्बाद। 

ना माँ, ना पिता, ना बीवी ना बच्चे, अब कोई नहीं है मेरे पास। 
खाली बोतल सा बन गया हूँ ; दिन गिन के लेता हूँ हर सांस।  

यारों .. सुनो एक शराबी की नसीहत .. कभी न फँसना इस ज़हर के हाथ। 
वरना ! तुम भी बन जाओगे एक ज़िंदा लाश !!
 

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