Saturday, December 6, 2014

Ehsaas !

अहसास

सोचो सोचो क्या होता? 
अगर ऐसा होता।   
सागर बिन लहरों के। 
गगन बिन तारों के। 
 कली बिन भंवरों के। 
चकोरी बिन चाँद के। 
कमल बिन सूरज के। 
चेहरा बिन मुस्कान के। 
लब्ज़ बिन आवाज़ के। 

लगता है जीवन सूना ऐसे। 
तेरे बिना, तेरे बिना। 
तुम हो अनमोल, मेरे लिए सदा सदा।  

 
 


Sapna..:)

सपना

एक दिन सपने में, मुझे मिला एक थैला। 
थैला था तो सुन्दर, पर थोड़ा था मैला। 

मैं ने धीरे से उसे खोला तो उसमे से निकला।
तारों की एक माला। 
एक प्यारा चंदा, चाँदनी रातों वाला। 
एक सूरज जो देता उजाला। 

ये सारे बाहर निकले, मैं चली उनके पीछे। 
वो भागे, मैं भागी, पीछे-पीछे। 
फिर भी न मिले वो,
क्योंकि तब तक हो गया था सवेरा।